A leafless tree, With endless roots Aimless growth Mindless pursuits What's the fate of a passing day? Will night fall? Who knows? Still unnerved The eyes look for, A certain tomorrow An image obscure Wishful thoughts galore! Deep below the leafless tree The roots hold on To mud and nothing Still in search, Of a spring, Deep down within On way back To an abandoned home Directions merge In circuitous maze Which path to take? Drops of sweat and shiver Mind oscillates, Between never and forever
How does one prevent? The flight of time The mind thinks, Eyes see And they think They exist........ An yesterday's dream Still flows as a stream It aches at times But still, An obstinate urge To keep breathing! Deep down an alley Labyrinthine and dark Sightless strides And silent sighs Some one walks Towards nothing Will this hold? It's damp and cold, The fire? The breeze, the rain? Universe conspires Inflicts pain But then what else? No one hears Nor sees the pain But they speak Myths unfold, Stories are told
झुलसती धूप में छाँव से आए थे न जाने तुम किस गाँव से आए थे न देखा न सुना सिर्फ महसूस किया कुछ इस तरह दबे पाँव से आए थे जहाँ रुका सा था धड़कनों का काफ़िला तुम वक़्त के उसी पड़ाव से आए थे सर्द रातों की ठिठुरन में तुम बनकर एक अलाव से आये थे उभरी थी चट्टानों पर उम्मीदों की शक्ल जब तुम दरिया के बहाव से आये थे लेकर यादों की भीगी सी महक तुम पूरब की हवाओँ से आये थे अब भी भागती है ज़िन्दगी बेवजह तुम्ही थे जो एक ठहराव से आये थे
फ़िरते हुए यूँ ही बेवजह कल चला आया था वहीँ वहीँ जहाँ रुके थे क़दम जहाँ कभी चला सा था रुके से वक़्त का कारवाँ मुझे मेरी फ़िराक़ थी जो ढूंढने चला था मैं कहाँ जुदा हुआ था मैं ख़ुद ही अपने आप से था रेत से सना हुआ और ज़रा डरा हुआ ज़ख्म के निशाँ भी थे वो अक्स कुछ अजीब थी मेरी तरह शक्ल लिए नब्ज़ चल रहा था पर थी साँस कुछ थमी हुई होठों पे काँपता था कुछ नाराज़ सा लगा था वो अलग ही कुछ लगा था वो पहचान से परे मेरे मगर कशिश अजीब थी उसकी बेज़ुबाँ निगाह की लौट आ गया था मैं ज़हन में कुछ कसाव था वो कौन था पड़ा हुआ सीने पर आइना लिए ?
Foot marks..... All that'l remain On the shore of an ocean When memories vane A pair of feet Would've walked alone Back to the beginnings Of times bygone Still will flow The rain-wet breeze Long beyond Since breaths would cease The sun would rise Like now each day But a pair of eyes Would've nothing to say Following the hue Of a deep twilight The sounds will fade Nothing in sight Waves would churn The soil beneath But find no signs No shroud no wreath Into the depths Both dark and dense Would lie alseep Some dream's essence
सुनाई देती है आज बंद खिड़कियों से आवाज़ दिखाई देती है बदलते वक़्त की आगाज़ फिर भी जाने क्यों बावरा सा हो मन दौड़ता है पकड़ने को एक छूटी हुई धड़कन साँसों के काफ़िले से दूर पड़ा कोई गाँव आँखें ढूँढ़ती है वहाँ यादों की बनी छाँव कि तोड़ी थी जानकर दीवारें आस पास की एक भरोसे की थी झलक कुछ सुकून की आस थी उस घर का क्या करूँ मैं मुझे छोड़ जो चला था जहाँ चिराग़ करने रौशन मेरा हौंसला जला था
झकझोर सा दिया है मुझे उसी हवा ने समझा जिसे था साँसें वो कहर के कारवाँ ने नहीं और कुछ है सुनना न ही है कोई फ़साना मेरे कल की महफ़िलों मे न है मेरा आना जाना उन्हें ख़्वाब मुबारक़ झूठा मगर सुहाना मैं तो ख़ाक का बना था था ये ज़लज़ला बहाना