Moist, heavy and cold
Thus the breeze blows
A drop of dew glows
Freshly fallen from an eye
Sounds of silence roar
Breakers batter the shore
The wall can take no more
Salt has eaten its core
Too much time has passed
With a load of nothings amassed
The weight that doesn't pain
But signs of hurt remain
The ghosts of yesterday
Haunt the woods today
In twisted trails of mind
Hide and seek they play
Tough to still withstand
The humble castle of sand
Crumbles upon its weight
Gives up the fight with fate
Inside the rusty clock
Times have come to a stop
A pair of sleepless eyes
Just watch the moments drop
कल मिला एक दीवाने से
वो तसव्वुर के बाज़ार में
चंद ख्वाबों की ख्वाइश लिए
अपनी नींद बेच रहा था
हाथ लिए बुझता सा चिराग़
जिसकी कालिख़ आँखों में समायी थी
रात की सियाह को टटोलता
आँधियों की फ़िराक थी उसे
थी हक़ीक़त की दुनिया कहाँ
ख्वाबों सी खूबसूरत कभी
वो दिलकशी का आशिक़ था
उसे जागने की आदत न थी
एक उफनती नदी में वो
हाथ डाले बैठा था
उसकी किस्मत ने दम तोड़ा था
वो लकीरों को बहा आया
हाँ था कुछ ऐसा दीवाना
ख्वाबों की कद्र करता था
सुला के जज़्बातों को आज
नींद बेच रहा था वो
नज़रें दग़ा करती है
या है शायद यादों का फ़रेब
जो दिखता है वो सच है ?
या गुज़रे लम्हों की कब्र कोई
सूखी सी मिटटी उड़ती है
आँखों को बड़ी चुभती है
नहीं है अब खुशबू भीनी
है बस काटों की चुभन
और थोड़ा सा किरकिरापन
वो फूल जो गिराए थे कभी
किसी की रहमदिली लेकर
हज़ार टुकड़ों में बिखरे हैं
ले सरसराहट सिहरन से भरी
बदहाल ही अपने रंग ढूँढ़ते हैं
अब तो आईना भी झूठा है
या फिर कुछ मुझसे रूठा है
बैठा है अश्क़ों की कब्रगाह में
और मेरी आँखों से
ख्वाबों का पता पूछता है
नाकाम सी रहती है
हर कोशिश ,
चुप रहने की जद्दोजहद
अपने सवालों को
ज़हन में दफ़्न करने का फन
बेकार ज़ायर होती है
पढ़ लेते हो क्यों ?
महज़ एक किताब की तरह
चहरे पर लिखी कहानी
जिसका न है रंग कोई
जिसे अश्क़ों की स्याही से
कई बार लिखी है हमने
पहना तो है नक़ाब कई
पर सब कुछ है यूँ बेअसर
तुम्हारी ख़ामोशी की आवाज़
यूँ ही पहुँच जाती है मुझ तक
उसी ख़ामोशी की गूँज
मेरी शक्ल पर उभरती है
और दिखता है तुम्हे
चहरे पे सवालों के निशान
अजीब अनसुलझी पहेली है
मसाइलों के बाज़ार में
जज़्बातों की भीड़ है
फिर भी ज़िन्दगी अकेली है
कल अचानक के अँधेरे ने
चुराई नींद उनकी
वो कल को ढूंढते रहे
और कल उनसे छिपता रहा
यूँ ही खेलती है कुछ
हँसी -ग़म की लुकाछिपी
रुख़ पर चलता है सदा
अश्क़ो -मुस्कुराहटों का सिलसिला
वो हैं कोई किताब जहाँ
हज़ारों पन्नों की लिखावट में
कई किरदारों में नज़र आती है
कहानी एक ही खूबसूरत कोई
हाँ खूबसूरत है वो
कि इंद्रधनु के रंग लिए
बनाती है तस्वीर हँसीं
कुछ अपना ही ढंग लिए
उलझती लफ़्ज़ों में लिखी
एक हँसीं सी पहेली है
है लोग बेशुमार मगर
ज़िन्दगी अकेली है
बहुत कुछ कहती हैं
दो रतजगी आँखें
करती है बयां
बीते दिन की दास्ताँ
कोई वाकया कमदर्द सा
कि जिससे लगी चोट कोई
या फिर हसरत कोई
टूटा जो सच के आईने में
उन आँखों के उजले पन्नो पर
लिखें है कई ख्वाबों के ग़ज़ल
ओढ़े हैं कुछ दर्द के लिहाफ़
और कुछ अभी है अधूरे से
शायद अरसे से है ठहरा
उन आँखों में कोई बादल गहरा
जिससे ज़हन में नमी सी है
पर एक बरसात की कमी सी है
नक्शा है दिल के रास्तों का
एक नींद की तलाश भी है
है उम्मीदों का दिया जलता सा
और ग़म का कुछ एहसास भी है
क्या करें की रुकती नहीं
जज़्बातों की खामोश नदी
फूट पढ़ती है आँखों की गोद से
बहती है बना अपना ही रास्ता
बहुत कुछ कहती हैं
दो रतजगी आँखें
करती है बयां
बीते दिन की दास्ताँ...
घिर आए हो तुम आज
फिर से वो सावन बनकर
ज़हन में उठी मिटटी की महक
और आँखें फिर से बरसने लगी
महक उसी भीगी सी मिटटी की
ताज़े है जहाँ आज भी शायद
तुम्हारी यादों से भरी तस्वीर लिए
तुम्हारे ही क़दमों के निशाँ
वो उलझे हुए लफ़्ज़ों के सिलसिले
सुलझते थे जहाँ सवाल कई
दिलो दिमाग़ की तकरार लिए
बेपरवाह से थे वो सवाल जवाब
मेरे माज़ी में जब भी देखता हूँ
तुमसे न मिल पाता हूँ मैं
न मुस्तक़बिल में नज़र आते हो
फिर,क्या आज भी हो साथ मेरे ?
शायद मेरे वक़्त के पन्नो पर
तुम कभी बीते ही नहीं
या फिर तुम पर आकर कहीं
थम सी गयी है ज़हन की घड़ी
शीशे के बने हर आईने में
हूँ अब भी अकेला मैं मगर
जब भी ख़ुद से मिलता हूँ
मुझे तुम से घिरा पाता हूँ
देखा जो आज भी इधर उधर
हैराँ हूँ हर जगह तुम्हे पाकर
हाँ आज भी हो तुम साथ मेरे
मेरी बातों के हमसफ़र